नई दिल्ली: हिंदी फीचर फिल्म 'मोदी काका का गांव' शुक्रवार को देश भर के सिनेमा घरों में रिलीज हुआ। बता दें कि इससे पहले इस फिल्म का नाम 'मोदी का गांव' रखा गया था। जिसपर एतराज के बाद इसे बदलकर 'मोदी काका का गांव' किया गया।

फिल्म निर्माण का काम 11 महीने पहले ही पूरा हो चुका था। दरअसल सेंसर प्रमाण पत्र में देरी के कारण फिल्म के रूपहले पर्दे तक पहुंचने में समय लगा।

ये फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के नारों से प्रभावित है। ऐसा माना जा रहा है कि गुजरात चुनाव तक इस फिल्म को लटका कर रखा गया। ताकि इसे देखकर मतदाता प्रभावित न हो जाएं।

फिल्म के निर्माता सुरेश के झा ने इसे समसामियक राजनीति पर बेहतरीन फिल्म करार दिया है। जिसे महाराष्ट्र गुजरात सहित उत्तर भारत के राज्यों में 600 सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। फिल्म की सफलता को देखते हुए इसे देश के बाकी हिस्सों में भी प्रदर्शित करने की योजना है।

फिल्म देखने के बाद लगता है कि इसको लेकर बेवजह ही विवाद किया गया। फिल्म में चुटीले अंदाज में राजनेताओं पर टिप्पणियां की गई हैं। ये फिल्म किसी भी तरह से पीएम मोदी की छवि को खराब नहीं करता है। बल्कि कई जगहों पर तो ये सरकार को बेहतर करने के लिए प्रेरणा देता नजर आता है।

फिल्म में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजरिए और सोच को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। मोदी की भूमिका में कलाकार ने लोगों को प्रभावित किया है।