फिल्म का नाम- हेड कांस्टेबल वेंकटरामय्या

निर्देशक- चदलवाडा श्रीनिवास राव

कलाकार- आर. नारायण मूर्ति, जयसुधा, सुनील शर्मा व अन्य

संगीत- वंदे मातरम् श्रीनिवास राव

निर्माता- चदलवाडा पद्मावती

पीपुल्स स्टार आर. नारायण मूर्ति बाहर की फिल्मों में अभिनय कम ही करते हैं। क्योंकि वे स्वयं अभिनेता, निर्देशक व निर्माता के रूप में फिल्में बनाते हैं। ऐसे में अन्य के बैनर तले अभिनय करना सबके लिए आश्चर्य की बात है। इसके अलावा उनके साथ जयसुधा का अभिनय करना भी फिल्म की बड़ी खासियत है। साथ ही चदलवाडा श्रीनिवास राव की उनके निर्देशन में निर्मित 'हेड कांस्टेबल वेंकटरामय्या' यह पहली फिल्म है। उनके निर्देशन में अभिनय करने के लिए नारायण मूर्ति और पीपुल्स स्टार से जयसुधा अभिनय करने के लिए स्वीकार करना ही इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता है। इस बात से स्पष्ट होता है कि इस फिल्म की कहानी कुछ गंभीर मुद्दों पर व संदेशात्मक होगी।

कहानी-

हेड कांस्टेबल वेंकटरामय्या (आर. नारायम मूर्ति) एक सच्चा व ईमानदार व्यक्ति है। किसी भी परिस्थिति में रिश्वत लेना या हालात से समझौता करना पसंद नहीं है। उनका दृढ़ विश्वास है कि पैसे वाला नहीं...सच्चा व ईमानदार व्यक्ति ही महान होता है। उनकी पत्नी पद्मा (जयसुधा) इससे भिन्न स्वभाव की महिला है। पद्मा का मानना है कि सिद्धांत से काम नहीं चलता। हमेशा जेब भरने पर जोर देती रहती है। सह पुलिसकर्मी भी वेंकरामय्या का सिद्धांत पसंद नहीं करते। किसी भी हालत के सामने नहीं झुकने वाले वेंकटरामय्या को गृहमंत्री एक भ्रष्टाचार के मामले फंसा कर अपमानित करते है। उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली जाती है। हेड कांस्टेबल मानता है कि इस घटना के पीछे कालाधन ही मुख्य कारण है। वह इस काले धन को अंत करने का संकल्प लेता है। यह कैसे पाया? गृहमंत्री और हेड कांस्टेबल के बीच झगड़ा कैसे आरंभ हुा? अंत में क्या हुआ? यही इस फिल्म की बाकी कहानी है।

समीक्षा-

यह फिल्म वर्तमान की आर्थिक व सामाजिक हालात पर निर्मित है। संदेशात्मक फिल्मों का निर्माण करने वाले नारायण मूर्ति तथा अभिनेत्री जयसुधा के बारे में कुछ और कहने की आवश्यकता नहीं है। दोनों का अभिनयन अच्छा है। हंसी-मजाक भी है। कुल मिलाकर 'हेड कांस्टेबल वेंकटरामय्या' फुल मनोरंजक और बेहतर संदेश देने वाली फिल्म है।