जॉनर : मॉस एक्शन ड्रामा , कलाकार : चिरंजीवी, काजल अग्रवाल, अली, तरुण अरोड़ा, संगीत :देवीश्री प्रसाद, निर्देशन : वी.वी. विनायक, निर्माता : राम चरण

हाल के कुछ वर्षों में टॉलीवुड में भारी हाइप क्रिएट करने वाली फिल्म है कैदी नंबर 150। नौ वर्षों के अंतराल के बाद मेगास्टार चिरंजीवी का बतौर अभिनेता के रूप में रूपहले पर्दे पर लौटने, मेगा पॉवर स्टार राम चरण का निर्माता बनने, तमिल में सफल रही कत्ती फिल्म को तेलुगु में कैदी नंबर 150 के नाम से रिमेक करने से इस फिल्म को लेकर लोगों की हाइप के साथ उम्मीदें बढ़ गयी थीं।

तो क्या मेगास्टर लोगों की उम्मीदों पर क्या खरे उतरे? कैदी नंबर 150 से रूपहले पर्दे पर लौटे चिरु बॉस ईज बॉस बैक कहलाएं हैं या नहीं ?

कहानी : तमिलनाडु में सफलता के झंडे गाड़ चुकी फिल्म कत्ती में बगैर किसी बदलाव के कैदी नंबर 150 फिल्म तेलुगु में बनाई गयी है। चोरी, धोखाधड़ी कर कोलकाता सेंट्रल जेल में सजा काट रहे कैदी है कत्ती श्रीनू (चिरंजीवी)।

शूटिंग के दौरान काजल के साथ चिरंजीवी, वी.वी. विनायक, अली
शूटिंग के दौरान काजल के साथ चिरंजीवी, वी.वी. विनायक, अली

उसी जेल से एक कैदी फरार हो जाता है और उस कैदी को पकडने के लिये जेलर कत्ती श्रीनू से मदद मांगता है। लेकिन कत्ती श्रीनू फरार कैदी को पकडवा कर खुद फरार हो जाता है। भारत में रहने से पुलिस की नजर से बचना मुश्किल मानते हुए वह अपने दोस्त (अली) की मदद से बैंकाक जाने का फैसला करता है। परंतु एयरपोर्ट में लक्ष्मी (काजल अग्रवाल) को देखकर पहली ही नजर में उससे प्यार कर बैठता है। इससे वह बैंकाक जाने के बजाय भारत में ही रह जाता है।

कत्ती श्रीनू लक्ष्मी की तलाश में रहता है कि तभी उसका हमशक्ल शंकर (चिरंजीवी) को कुछ लोग टक्कर मारने के बाद उसपर गोली चलाकर फरार हो जाते हैं। श्रीनू आखिरी सांसे गिन रहे शंकर को बचाता है, और पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिये अपने कपडे शंकर को पहनाकर वहां से भाग जाता है, ताकि पुलिस शंकर को ही श्रीनू समॉझे।

शंकर को कोलकाता पुलिस गिरफ्तार करती है। लक्ष्मी के धोखा देने का पता चलने पर श्रीनू वापस बैंकाक जाने का फैसला करता है, लेकिन उसी वक्त शंकर के लोग श्रीनू को शंकर समझ कर अपने साथ ले जाते हैं। उस समय शंकर की हत्या का प्रयास करने वाले कार्पोरेट इंडस्ट्रलिस्ट अग्रवाल ( तरुण अरोडा) श्रीनू को बुलाकर 25 करोड़ रुपये की पेशकश करता है और उसके बदले में वहां के बूढ़ों को छोड़कर चले जाने को कहता है। श्रीनू इसके लिये राजी होता है और रुपये लेकर निकल जाता है।

फिल्म में डांस का एक आकर्षक दृश्य
फिल्म में डांस का एक आकर्षक दृश्य

परंतु शंकर द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में उसके संघर्ष के बारे में जानकर श्रीनू मन पिघल जाता है। ईमानदार शंकर के संघर्ष को जीतना मुश्किल मानते हुए खुद शंकर बनकर किसानों को जीतवाने का निर्णय लेता है। आखिर शंकर ने किस तरह का संघर्ष किया...एक टीवी रिपोर्ट की अनदेखी करने वाली समस्या को देश की नजर में लाने के लिये उसने क्या किया, आखिर में क्या शंकर की कामना पूरी हुई, शंकर और श्रीनू मिले... बाकी कहनी में है।

अभिनेता-अभिनेत्री

नौ वर्षों के बाद रूपहले पर्दे पर लौटे मेगास्टार चिरंजीवी ने इस फिल्म के जरिए साबित कर दिया है कि उनके जोश में कोई कमी नहीं आयी है। मॉस डांस, एक्शन के साथ अपने प्रशंसकों को खूब खुश किया है। मुख्य रूप से अपनी कॉमिडी टाइमिंग से रिएंट्री में सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया है। एमोशनल सीन्स में चिरंजीवी का किरदार लोगों के आंसु बहने के लिये मजबूर कर देता है।

अभिनेत्री काजल अग्रवाल का अभिनय भी काफी सीमित है। अभिनय के लिये फिल्म में ज्यादा स्कोप नहीं होने के कारण वह केवल अपने ग्लामर्स से दर्शकों को आकर्षित कर पाई है। मुख्य विलन के रूप में तरुण अरोडा पर्दे पर नजर आये हैं। चिरंजीवी के फ्रैंड के रूप में अली बिलकुल खरे उतरे हैं। अन्य किरदारों में ब्रह्मानंदम, पोसानी कृष्णमुरली, जयप्रकाश रेड्डी का अभिनय भी ठीक-ठाक है।

शूटिंग के दौरान फिल्म के निर्देशक वीवी विनायक के साथ चिरंजीवी 
शूटिंग के दौरान फिल्म के निर्देशक वीवी विनायक के साथ चिरंजीवी 

तकनीकी :

इस फिल्म का मेजर प्लस मुरुगुदास की कहानी। नेटिविटी की समस्या पैदा न हो, इसके लिये देश के किसी भी क्षेत्र के लोगों को आकर्षित करने वाली किसान समस्या को कहानी के रूप में चुना है मुरुगुदास ने। इससे पहले मुरुगुदास की फिल्म को टैगोर के रूप में तेलुगु में रिमेक करने का अनुभव रखने वाले निर्देशक वीवी विनायक की एक और कोशिश सफल साबित हुई है। चिरंजीवी की इमेज के अनुरूप किये गये बदलाव वर्कआउट हुए हैं। परंतु क्लाइमैक्स के मामले में ओरिजनल में दिखा एमोशन्स कैदी नंबर 150 से मिस है।

मुख्य रूप से कामिडी के लिये क्रिएट किया गया ब्रह्मानंद का किरदार, चिरंजीवी और ब्रह्मानंदम के बीच आने वाले कामेडी सीन्स फिल्म के लिये प्लस प्वाइंट साबित हुए हैं। कुल मिलाकर चिरंजीवी के प्रशंसकों को खुश करने वाली पक्की कमर्शियल एंटरनेटर के रूप में फिल्म को पर्दे पर लाने में विनायक सफल रहे हैं। फिल्म में सिनमेटोग्राफी-रत्नवेलू, संगीत-देवीश्री प्रसाद, कोरियोग्राफी- जॉनी और लारेन्स हैं।

प्लस प्वाइंट्स चिरंजीवी का अभिनय , स्टोरी स्क्रीनप्ले, संगीत

माइनस प्वाइंट्स , विलन का कमजोर किरदार ,क्लाइमैक्स