'गौतमीपुत्र शातकर्णी' : फिल्म समीक्षा

नाम- गौतमीपुत्र शातकर्णी

धार्मिक ऐतिहासिक फिल्म

कलाकार : नंदमूरी बालकृष्ण, श्रेया, हेमामालिनी, कबीर बेदी, शिवराज व अन्य।

संगीत: चिरंतन भट्ट

निर्देषक: राधाकृष्ण जागर्लामूडी

निर्माता: वाई. राजीव रेड्डी व साईबाबू

अभिनेता नंदमूरी बालकृष्ण की कृष के निर्देशन में निर्मित ऐतिहासिक भव्य फिल्म गौतमीपुत्र शातकर्णी मूल रूप में तेलुगू में बनी है। इस फिल्म को हिंदी में भी डब किया गया है। इसके अलावा बालकृष्णा की सौवीं फिल्म होने के कारण प्रशंसकों तथा फिल्मी इंडस्ट्री में कुछ अधिक ही अपेक्षाएं हैं। अपेक्षा के अनुसार क्या यह फिल्म खरी उतरेगी? इस ऐतिहासिक फिल्म को निर्देशक कृष ने केवल 79 दिनों में निर्मित की है। यह सब कैसे संभव हुआ है?

बालकृष्ण व श्रेया
बालकृष्ण व श्रेया

कहानी का अंश- शातकर्णी (बालकृष्ण) अमरावती राज्य का राजकुमार है। वह एक महावीर है। युद्ध करने के लिए हमेशा पिता को जाते देख उसे अच्छा नहीं लगता। वह सोचता है कि यदि भारत अखण्ड रहा तो युद्ध करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।अखण्ड देश स्थापित करने का वह माँ बालाश्री (हेमामालिनी) को वचन देता है। इसी संकल्प के साथ जैत्रयात्रा पर निकल पड़ता है। शातकर्णी के पराक्रम से पूरा दक्षिण भारत विजय प्राप्त करता है। इसके बात शातकर्णी की नजर उत्तर भारत पर पड़ती है।

अभिनेता बालकृष्ण
अभिनेता बालकृष्ण

नहपान नामक राजा उत्तर भारत को अन्य राज्यों की राजकुमारियों का अपहरण करते हुए अन्य राजाओं को अपने शरण में ले लेता है। नहपान को जब इस बात का पता चलता है कि शातकर्णी उसकी ओर बढ़ रहा है तो वह शातकर्णी को संदेश भेजता है कि दम हो तो पुत्र को लेकर युद्ध मैदान में आये। पत्नी (श्रेया) के विरोध करने के बावजूद शातकर्णी अपने पुत्र को युद्ध भूमि पर ले जाता है और विजय पाता है। इस युद्ध के बाद शातकर्णी अखण्ड भारत को स्थापित करता है।

फिल्म का एक दृश्य
फिल्म का एक दृश्य

अखण्ड भारत स्थापित होने के बाद भी अन्य देशों से भारत को खतरा पहले जैसा बना रहता है। यवन सम्राट डिमेत्रीस शातकर्णी से युद्ध करता है। उसका उद्देश्य शातकर्णी की हत्या करके अखण्ड भारत के टुकड़े-टुकड़े कर देना है। यवन के इस षडयंत्र का शातकर्णी ने कैसे मुकाबला किया? इस फिल्म की बाकी कहानी है।

प्लस प्वाइंट-

बालकृष्ण का अभिनय तथा कृष का निर्देशन अद्भूत है।

मायनस प्वाइंट-

कृष का मार्क ड्रामा का अभाव है।

कुल मिलाकर कर गौतमीपुत्र शातकर्णी तेलुगु भाषियों के लिए स्वाभिमान को प्रफुलित करने वाली फिल्म है। जिसे हिंदी भाषी दर्शक भी पसंद करेंगे।