हम सभी की जिंदगी जितनी आसान दिखती है, उतनी होती नहीं है। हम सभी की उलझनें हैं, ग्रंथियां हैं, दिक्कतें हैं...हम सभी पूरी जिंदगी उन्हें सुलझाते रहते हैं। खुश रहने की कोशिश करते हैं। अनसुलझी गुत्थियों से एडजस्ट कर लेते हैं। बाहर से सब कुछ शांत, सुचारू और स्थिर लगता है, लेकिन अंदर ही अंदर खदबदाहट जारी रहती है। किसी नाजुक क्षण में सच का एहसास होता है तो बची जिंदगी खुशगवार हो जाती है। गौरी शिंदे की डियर जिंदगी क्यारा उर्फ कोको की जिंदगी में झांकती है। क्यारा अकेली ऐसी लड़की नहीं है। अगर हम अपने आसपास देखें तो अनेक लड़कियां मिलेंगी। वे सभी जूझ रही हैं। अगर समय पर उनकी भी जिंदगी में जहांगीर खान जैसा दिमाग का डाक्टर आ जाए तो शेष जिंदगी सुधर जाए।

मुंबई से कियारा को कुछ कारणों से अपने माता-पिता के पास गोआ जाना पड़ता है। यहां उसकी मुलाकात दिमाग के डॉक्टर जहांगीर खान उर्फ जग्स (शाहरुख खान) से होती है। कियारा उससे सलाह लेने के लिए जाती है और जग्स से लगातार मुलाकात उसका जिंदगी के प्रति दृष्टिकोण बदल देती है। उसे समझ में आता है कि उसका व्यवहार और जिंदगी के प्रति नजरिया ऐसा क्यों हो गया है।

कियारा उर्फ कोको (आलिया भट्ट) एक सिनेमेटोग्राफर है जो एक दिन खुद फिल्म बनाना चाहती है। वो अपने करियर और फ्यूचर को लेकर बिल्कुल फोकस्ड है लेकिन रिलेशनशिप को लेकर कन्फ्यूज। वो सिड (अंगद बेदी) के साथ रिलेशन तोड़ देती है क्योंकि उसे सिंगापुर में शूट के दौरान रघुवेंद्र (कुणाल कपूर) से प्यार हो जाता है। बाद में वो रघुवेंद्र के साथ भी रिलेशनशिप को लेकर कन्फयूज हो जाती है लेकिन दोनों निर्णय लेते हैं कि उन्हें सीरियर हो जाना चाहिए।

बाद में सबकुछ बदल जाता है और दोनों ब्रेकअप कर लेते हैं जिसके बाद कियारा अपनी जिंदगी,कमिटमेंट,रिलेशनशिप को लेकर सोच में पड़ जाती है। वो गोवा एक फैमिली फ्रेंड के होटल का वीडियो शूट करने निकलती है और ये ट्रिप उसकी जिंदगी बदल देता है। वहां एक मेंटल हेल्थ और अवेयरनेस सेमीनार में उसकी मुलाकात डॉ जग्स उर्फ जहांगीर (शाहरुख खान) से होती है जो साइकोलॉजिस्ट हैं। डॉ जग्स की थेरेपी कियारा पर असर कर जाती है।

ये फिल्म आज के समय की बिल्कुल सही कहानी बयां करती है। हर किसी की जिंदगी में प्यार, करियर, रिलेशनशिप, नफरत, जलन,इनसिक्योरिटी और कई प्रॉबल्म होते हैं जिसे गौरी शिंदे ने इस फिल्म के जरीए दिखाया है।