पिछले शुक्रवार रिलीज हुई नामी कलाकारों की दो मेगा बजट फिल्मों शिवाय और ऐ दिल है मुश्किल ने अभी भी राजधानी दिल्ली सहित दूसरे शहरों के ज्यादातर सिनेमाघरों पर अपना कब्जा जमा रखा है। ऐसे में इस शुक्रवार को किसी बड़े बैनर या स्टार की नई फिल्म रिलीज नहीं हुई, तो काफी समय से रिलीज का इंतजार कर रही इस ऐनिमेशन फिल्म के मेकर्स को लगा सिल्वर स्क्रीन को तरसती अपनी इस ऐनिमेशन फिल्म को कैसे भी रिलीज कर दिया जाए।

पिछले कुछ सालों में हमारे यहां ऐनिमेशन तकनीक में नए बदलाव और लेटेस्ट तकनीक का अच्छा इस्तेमाल होने लगा है, लेकिन कम बजट में फिल्म बनाने वाले मेकर आज भी बरसों पुरानी ऐनिमेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। डायरेक्टर रोहित वैद ने भी अपनी इस फिल्म में कुछ नया और अलग दिखाने की बजाएं एकबार फिर वहीं बरसों पुरानी ऐनिमेशन तकनीक का सहारा लेकर श्री राम जन्म से लेकर राम-रावण युद्ध और वनवास से श्री राम-सीता, लक्ष्मण की वापसी तक की कथा पर करीब पौने 2 घंटे की इस फिल्म में परोसा है। फिल्म का टाइटिल बेशक महायोद्धा राम हो, लेकिन फिल्म में डायरेक्टर राइटर ने श्री राम की शौर्य गाथा को रावण के नजरिए से पेश किया और सिनेमैटिक लिबर्टी के नाम पर बहुत कुछ ऐसा भी किया जो बरसों से रामलीला देखते आ रहे दर्शकों और रामायण का अध्ययन करने वालों की नजरों में यकीनन खटक सकता है।

अक्सर धार्मिक पौराणिक सब्जेक्ट पर फिल्म का निर्माण करने से पहले प्रॉडक्शन कंपनी और फिल्म के डायरेक्टर प्राचीन ग्रंथों और उनके किरदारों पर पूरी गहराई से जांच करते है, लेकिन इस फिल्म को बनाते वक्त शायद डायरेक्टर रोहित वैद ने ऐसा कुछ भी नहीं किया, तभी तो इस फिल्म में एक नहीं ऐसे कई सीन्स नजर आते है, जिनका रामायण में कहीं जिक्र तक नहीं किया गया। फिल्म के क्लाइमेक्स में दिखाया गया है राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण के साथ श्री राम भी अचेत हो गए थे तो सीता स्वयंवर के सीन में दिखाया गया है रावण की मौजूदगी में श्री राम सबसे पहले आसानी से शिव का दिया धनुष उठा लेते है तो वहीं सीता महल में कराटे की प्रैक्टिस करती नजर आती हैं।

बेशक रोहित ने इस फिल्म को बच्चों की पसंद को ध्यान में रखकर बनाया है, लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि हर साल रामलीला देखने वाली हमारी भावी पीढ़ी राम- रावण युद्ध के बारे में बहुत कुछ जानती हैं। अगर ऐनिमेशन तकनीक की बात करे तो पता नहीं क्यों डायरेक्टर ने श्री राम को नीले रंग में पेश किया है तो वहीं फिल्म के कई किरदार अलग-अलग भाषा में बात करते नजर आते हैं।

डायरेक्टर अगर ऐनिमेशन तकनीक में बनी इस फिल्म में वीएफएक्स का ज्यादा इस्तेमाल करते तो यकीनन फिल्म की क्वॉलिटी बहुत अच्छी बन पाती। अगर डबिंग की बात की जाए तो यकीनन गुलशन ग्रोवर बाकी दूसरे डबिंग आर्टिस्टों पर भारी पड़े हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और डायरेक्टर की कहानी और तकनीक पर अच्छी पकड़ न होने की वजह से रावण का किरदार भी फिल्म में अजीबोगरीब ढंग से पेश किया गया है। फिल्म में कई गाने हैं लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं जो हॉल से बाहर आकर आपकों याद रह सके।

क्यों देखें: अगर राम-रावण युद्ध की कहानी को आप रावण के नजरिए से देखना चाहते हैं तो देख आएं, लेकिन तकनीक साउंड और विजुअल इफेक्टस के मामले में कुछ भी नया नहीं है। वहीं रामायण के कुछ प्रसंगों को डायरेक्टर ने बिल्कुल अलग ढंग से पेश किया है जो यकीनन रामायण की अच्छी जानकारी रखने वालों के साथ रामलीला देखने वाली भावी पीढ़ी को भी अखर सकता हैं।

डबिंग आर्टिस्ट: जिम्मी शेरगिल, कुणाल कपूर, गुलशन ग्रोवर, रजा मुराद, अमीन सयानी, सदाशिव अमराकपुर और मौनी रॉय