हैदराबाद : आंध्र प्रदेश में पोलावरम परियोजना पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बनी हुई है। इस परियोजना का श्रेय लेने के लिये एक तरह की होड़ मची हुई है। वास्तव में इस परियोजना का श्रेय दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ.वाईएस राजशेखर रेड्डी को जाता है, जिन्होंने लोगों की समस्याएं जानने के लिये वर्ष 2004 में करीब 1600 किलो मीटर लंबी प्रजा प्रस्थानम (पदयात्रा) की थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य के लोगों को पेयजल और लाखों एकड़ कृषि भूमि को पानी पहुंचाने के उद्देश्य से इस पोलवरम परियोजना की नींव रखी थी।

परंतु राज्य के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू सहित टीडीपी के नेता लोगों में यह साबित करने की जुगत में लगे हैं कि पोलावरम परियोजना उनकी देन है और वही इस परियोजना की शुरूआत की थी।

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देश की आजादी से लेकर राज्य पर शासन करने वाले नेता केवल पोलवरम परियोजना के निर्माण का आश्वासन देते रहे, लेकिन किसी में उसे शुरू करने की हिम्मत नहीं थी। पेयजल और सिंचाई जल नहीं होने से राज्य के परेशान लोगों को देखकर वाईएसआर ने पोलवरम परियोजना के निर्माण का फैसला किया और इसके लिए जरूरी अनुमतियां हासिल करने के लिए उन्होंने केंद्र पर दबाव बनाया।

केंद्र की मनमोहन सिंह की सरकार से परियोजना के लिए पर्यावरण, वन सहित सभी प्रकार की अनुमतियां हासिल करने के बाद अपने बहुचर्चित जलयज्ञम के तहत पोलवरम सहित राज्य में अनेक सिंचाई परियोनाओं के निर्माण का काम शुरू किया था।

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वाईएसआर के पहले कार्यकाल में पोलवरम को छोड़ लगभग सभी परियोजनाओं का निर्माण कर उनका उद्घाटन किया गया। वाईएसआर जब दूसरी बार चुनकर सत्ता में आए तो उस वक्त पोलवरम परियोजना का काम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका था। परंतु सत्ता में आने के चार महीने बाद ही उनका हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन हो गया।

इसके बाद राज्य में लगभग सभी सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कार्य रुक से गए। वाईएसआर के बाद तीन मुख्यमंत्री बने, लेकिन वे इन परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पाए। वाईएसआर ने 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से पोलवरम परियोजना के निर्माण शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे अब यह राशि बढ़कर 60 करोड़ तक पहुंच गई है। वाईएसआर ने जीवित रहते परियोजना पर करीब 5500 करोड़ रुपये खर्च कर चुके थे। वाईएसआर के मुख्यमंत्री बनने से पहले लगभग 9 वर्षों तक राज्य पर शासन करने के बाद भी चंद्रबाबू ने पोलावरम का जिक्र तक नहीं किया था।

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पिछले चुनाव के दौरान टीडीपी प्रमुख नारा चंद्रबाबू नायडू ने पोलवरम परियोजना के बाकी काम अगले चार वर्षों में पूरा करने का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हो पाया है। पोलवरम परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा मिला था और उसके निर्माण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की थी। लेकिन राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने केवल कमिशन के लालच में पोलवरम परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के हाथ में लेने के साथ ही परियोजना के स्पिल वे, बाएं और दाहिने कैनल तथा सुरंगों की खुदाई का काम अपने पार्टी के सांसद रायपाटी सुब्बाराव की कंपनी ट्रांस्ट्राय को सौंप दिया।

स्थानीय लोग खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री बाबू केवल कमिशन के लिए परियोजना के काम अलग-अलग कांट्रैक्टरों को सौंपते हुए परियोजना को पूरा नहीं कर रहे हैं। यही नहीं, बाबू ने सत्ता में आने के बाद पहले पोलवरम परियोजना को पूरा करने के बजाय केवल 355 करोड़ रुपए में बनने वाली पोतीरेड्डीपाडु परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर दिए।

वाईएसआर के निधन के बाद से उनके पुत्र व वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी पोलावरम परियोजना के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं। इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग को लेकर वाईएस जगन कई किलो मीटर की यात्रा करने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बाबत कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं। दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री नीतिन गड़करी ने पोलावरम परियोजना का दौरा कर वहां जारी कार्यों का जायजा लिया।

केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार को परियोजना से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों के साथ दिल्ली तलब किया है। बताया जाता है कि नीतिन गड़कारी ने पोलावरम परियोजना में हो रहे विलंब के लिए चंद्रबाबू नायडू सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। यही नहीं, बाबू सरकार पोलावरम परियोजना के विस्थापितों के साथ भी विश्वासघात किया है और उन्हें जमीन का उचित मूल्य का भुगतान नहीं किया है।