के. रामचंद्रमूर्ति की कलम से ....

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने मंगलवार को उस वक्त इतिहास रच दिया जब उन्होंने देश की सबसे लंबे रेल कम रोड ब्रिज पर हजारों समर्थकों व पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चलकर पूर्वी गोदावरी जिले में प्रवेश किया। गोदावरी नदी में जैसे-जैसे जलप्रवाह बढ़ रहा था वैसे-वैसे ब्रिज पर हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ रहा था। यह नजारा देखकर ठीक 15 साल पहले दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की प्रजा प्रस्थानम यात्रा की याद आई।

लोगों की समस्याएं जानने और उनसे सुझाव लेने एक ही परिवार के तीन सदस्यों का महीनों तक इस तरह की यात्रा पर निकलना भी एक बड़ी बात है। पूरे देश (या विश्व) में ऐसा कोई परिवार नहीं रहा है जिसके सदस्यों ने जनसमस्याएं जानने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा तय की हो।

दिवंगत वाईएसआर वर्ष 2003 में उस वक्त लोगों को सांत्वना और भरोसा देने निकले थे जब राज्य लगातार सूखे की मार झेल रहा था। उसके दस साल बाद वाईएसआर की बेटी शर्मिला अपने भाई वाईएस जगन के खिलाफ संप्रग सरकार और तत्कालीन विपक्ष के नेता नारा चंद्रबाबू नायडू के राजनीतिक षड़यंत्रों का पर्दाफाश करने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा की थी। संप्रग सरकार ने वाईएस जगन को जेल भेज दिया था।

श्यामला थिएटर के पास आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वाईएस जगन 
श्यामला थिएटर के पास आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए वाईएस जगन 

यह बात सार्वजनिक रहस्य है कि युवा राजनेता को जेल भेजने के लिये चंद्रबाबू नायडू और कांग्रेस हाईकमान ने हाथ मिलकार उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने के अलावा केंद्र में जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया था। वाईएस जगन को उस वक्त की सबसे कद्दावर और शक्तिशाली नेता सोनिया गांधी के खिलाफ जाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने बाद में अपनी अलग पार्टी की स्थापना की। शर्मिला के साहस के पांच साल बाद वाईएस जगनमोहन रेड्डी हजारों उत्साहित लोगों को आकर्षित करते हुए हर दो दिन में एक जनसभा का आयोजन करते हुए 195 से अधिक दिनों की यात्रा पर निकले हुए हैं।

मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के गलत शासन, भ्रष्टाचार और नॉन-परफार्मेन्स का पर्दाफाश करना ही वाईएस जगन का मिशन है। वाईएस जगन आधिकारिक आंकड़ों के साथ चंद्रबाबू नायडू सरकार के भ्रष्टाचार और प्रशासनिक खामियों को गिनाते हुए बाबू के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं। चंद्रबाबू पर हमला करने के लिए जगन ने अमरावती के निर्माण और पोलावरम परियोजना को मुख्य हथियार बनाए हैं।

इसके अतिरिक्त जगन चुनावी आश्वासनों पर अमल तथा राज्य को विशेष दर्जा दिलाने के लिए केंद्र को मनाने में बाबू की विफलता को हथियार बनाए हैं। चंद्रबाबू नायडू के चार साल के शासन में ऐसी कोई उपलब्धि नहीं है जो लोगों को दिखा सके। लोगों ने चुनाव में यह सोचकर चंद्रबाबू को वोट दिया था कि वह काफी अनुभवी हैं और शेष आंध्र प्रदेश का विकास करेंगे, लेकिन 40 साल का राजनीतिक अनुभव का दावा करने वाले चंद्रबाबू के राज में कोई खुश नहीं है।

वाईएस जगन को हल भेंट करते हुए लोग 
वाईएस जगन को हल भेंट करते हुए लोग 

वाईएसआर और उनके पुत्र द्वारा शुरू की गई पदयात्राओं की तुलना करना जरूरी। वाईएसआर के साथ ब्रिज पर जितने लोग उमड़े थे और उनमें उत्साह दिख रहा था, उससे कई ज्यादा लोग वाईएस जगनमोहन रेड्डी के साथ पहुंचे थे। इसके अलावा कुछ अन्य समानताएं भी हैं। वाईएसआर ने जब पदयात्रा की थी तब वह विधानसभा में विपक्ष के नेता थे और चंद्रबाबू नायडू राज्य के मुख्यमंत्री थे।

अब वाईएस जगनमोहन रेड्डी भी आंध्र प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ही हैं। पूर्वि गोदावरी जिले में जहां वाईएसआरसीपी ने वर्ष 2014 के चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती थी, वहां वाईएस जगन की यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जिन चार जिलों ने टीडीपी और वाईएसआरसीपी में फर्क डाला था, वे हैं कृष्णा, पश्चिमी गोदावरी, पूर्वी गोदावरी और विशाखापट्टणम। पहले दो जिलों में पदयात्रा सत्तारूढ़ पार्टी को झटके देते हुए बड़े पैमाने पर सफल रही। लगता है कि पूर्वी गोदावरी जिले में भी यही स्थिति बनी हुई है। नायडू ने भी वर्ष 2013 में पदयात्रा की थी जब वह विपक्ष में थे। बाबू की पदयात्रा अनंतपुर जिले के हिन्दूपुरम से शुरू होकर विशाखपट्टणम तक चली थी।

गोदावरी नदी को आरती देते हुए वाईएस जगन 
गोदावरी नदी को आरती देते हुए वाईएस जगन 

चंद्रबाबू नायडू ने भले ही सात महीने तक पदयात्रा की हो, लेकिन उनकी यात्रा में उतनी भीड़ नहीं उमड़ी थी, जितनी वाईएसआर और वाईएस जगन की पदयात्रा में उमड़ रही है। यह कहना गलत होगा कि पिछले चुनाव में टीडीपी की जीत केवल चंद्रबाबू नायडू की पदयात्रा की वजह से हुई थी, क्योंकि उसकी जीत के काई कारण हैं, जैसे कि एकीकृत आंध्र प्रदेश का विभाजन, भाजपा का नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाना, जनसेना अध्यक्ष पवन कल्याण का टीडीपी के समर्थन में प्रचार करना आदि। ऐसे भी टीडीपी बहुत कम अंतर से सरकार बना पाई थी। आंध्र प्रदेश में लगता है कि लोगों का मूड अब बदल गया है। इसीलिए वे किसी के भड़काए बिना ही सरकार के विरोध में आवाज उठाने लगे हैं। लगता है कि लोगों ने यह मन बना लिया है कि चंद्रबाबू को सत्ता से उखाड़ फेंके और उनकी जगह वाईएस जगनमोहन रेड्डी लेकर आएं।

जगन की प्रजा संकल्प यात्रा में उन्हें लोगों से जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, उसे देख नायडू अपना गेम खेल गए और ठीक उस वक्त राजग से अलग हो गए जब केंद्र उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप तथा वोट के बदले नोट मामलों की जांच शुरू करता। भाजपा नेतृत्व उपचुनाव और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चंद्रबाबू नायडू की गतिविधियों पर नजर नहीं रख पाया।

सही समय पर राजग से अलग होने के बाद नायडू और उनके सहयोगियों ने पीएम मोदी पर हमले तेज करने के साथ ही लोगों को यह कहकर गुमराह करना शुरू कर दिया कि भाजपा और वाईएसआरसीपी के बीच अंदरूनी समझौता हुआ है और चुनाव के बाद उनके बीच गठबंधन होगा। चंद्रबाबू नायडू ने राजग में रहते भी मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली के सामने इस तरह के आरोप लगाए थे।

2019 के चुनाव के लिये चंद्रबाबू नायडू ने एक रोड मैप तैयार किया है, जिसके मुताबिक राज्य में भाजपा विरोधी सेंटीमेंट का माहौल बनाना, भगवा पार्टी के खिलाफ भड़काना ताकि लोग भाजपा का घृणा कर सके और लोगों की भावनाओं को भुनाते हुए भाजपा विरोधी के कारण बनी स्पेस पर कब्जा कर सके। नायडू का यह गेमप्लान सफल होगा या नहीं यह तो वाईएस जगनमोहन रेड्डी को मिल रहे जनसमर्थन पर निर्भर करता है।

यह बात स्पष्ट है कि अगर आज की तारीख में चुनाव कराए जाएं, तो वाईएस जगन की जीत पक्की है। वाईएस जगन ने अपनी पदयात्रा के दौरान जो गुडविल अर्जित की है, वह प्रशंसनीय है। निजी संस्थाओं व संगठनों द्वारा कराए गये सर्वेक्षणों में भी यही निष्कर्ष निकला है। चार वर्षों तक भाजपा के साथ रहने के बाद अब अचानक उसके खिलाफ आक्रोश व्यक्त करने वाले चंद्रबाबू नायडू की बातों को लोग हजम नहीं कर सकेंगे।

लोग चंद्रबाबू नायडू के खेल को जान चुके हैं। टीडीपी सुप्रीमो वाईएस जगनमोहन रेड्डी नामक आंधी को रोक नहीं सकेंगे, जैसा कि वर्ष 2004 में वाईएसआर की आंधी को रोक नहीं पाए थे। शाम को स्थानीय श्यामला थिएटर सेंटर में भी जगन को जबर्दस्त जनसमर्थन मिला था और आगे उनके समर्थकों को रोकना संभव नहीं है।

(लेखक के. रामचंद्रमूर्ति साक्षी समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर भी हैं..)