- अरुण

संयोजक, रायलसीमा शिक्षाविद् मंच

आपके खुद को बार-बार रायलसीमा का बेटा बताने को लेकर आप कैसा महसूस करते हैं, इसका तो पता नहीं, लेकिन आपके साथ ही पले बढ़े हम लोग दुखदायी स्थिति का सामना कर रहे हैं। खुद को रायलसीमा का बेटा बताने के पीछे आपका 'गर्व' है या 'अपराध बोध', कहना मुश्किल है। अपनी बात रखने का जो तरीका आपने अख्तियार किया है उससे तो यही लगता है कि आप अपराध बोध से ग्रसित हैं।

वैसे भी चंद्रबाबू नायडू जी ! पेयजल व सिंचाई जल की किल्लत, रोजगार नहीं मिलने से अन्य राज्यों की तरफ रुख करते हुए भीख मांग रहे हम लोगों के लिये रायलसीमा के बेटे होने और देश में सबसे धनी मुख्यमंत्री बनना गर्व की बात नहीं है। यही नहीं, देश-विदेश के प्रमुखों में एक बिलगेट्स हो सकते है, सत्या नादेंडला हो सकते हैं, अंबानी-अडानी भी बन सकते हैं।

ये सभी आपके द्वारा पढ़ाए गये पाठ और सलाहों की बदौलत ही आज अपने-अपने क्षेत्रों में शिखर पर हैं। आप जैसे महान व्यक्तित्व वाले नेता को रायलसीमा का बेटा बताते हुए हमारा सिर ऊंचा होना चाहिए। जबकि बार-बार आपका खुद को रायलसीमा का बेटा बताना अटपटा लगता है।

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ऐसे भी आपको किसी बात को लेकर चिंता करने की जरूरत ही नहीं है। केवल आपके इशारे पर आप की बातों को अपनी अवाज में सुनाने वाले सैकड़ों लोग हमारे रायलसीमा में मौजूद हैं। आपके इशारे पर नाचने वाली मीडिया भी आपके साथ ही खड़ी है। यह भी सही है कि आपके विकास, उन्नति और खुशी को बर्दाश्त नहीं कर पाने और ईर्ष्या के कारण कुछ लोग आपको रायलसीमा का द्रोही, जिस थाली में खाया उसी में छेद करने वाला बताते हुए आपको कोस रहे हैं।

आपके द्वारा किये जा रहे विकास चाहे वह किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो, आपको लेकर नाराजगी व्यक्त करने वाले जरूर होते हैं। यहां के लोग आपकी उदारता, आपकी दरियादिली और आपकी अंतरात्मा को नहीं पहचानने वाले संकुचित मानसिकता वाले हैं। चंद्रबाबू नायडू जी! ऐसे लोगों को उनके हाल पर छोड़ दीजिए। यही सिलसिला आगे भी चलता रहा तो आपकी आलोचना करने वाले आपके जन्मस्थली रायलसीमा में कोई नहीं बचेगा, क्योंकि रोजगार के लिये राज्य की सरहद पार करके हम निकल जाएंगे, या फिर भूखमरी के शिकार हो जाएंगे।

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चंद्रबाबू नायडू जी आप एक अनुभवी और समझदार नेता हैं। हम जैसे मंद बुद्धि के लोगों के लिये आपकी नीतियां समझना मुश्किल है। आपका जन्म गलती से रायलसीमा में हुआ है। आपको तो किसी कृष्णा या गुंटूरु या फिर पूर्वी-पश्चिमी गोदावरी जिले, नहीं तो कम से कम विशाखपट्टणम जिले में पैदा होना चाहिए था।

रायलसीमा का सौभाग्य है कि आपका जन्म यहां हुआ है। रायलसीमा के लिये कुछ नहीं करने का आरोप लगाने के बाद भी क्रोधित हुए बिना आप बार-बार खुद को रायलसीमा का बेटा बताने की कोशिश करते हैं। इसके लिये तो रायलसीमा के बच्चे होने के नाते हमें आपका आभार प्रकट करना चाहिए। आपने पहले ही कहा था कि खेती बेकार है, लेकिन हमने आपकी नहीं सुनी और खेती के पीछे भागे और आज कर्ज में डूबे हुए हैं। हम अगर तभी आपकी बात मान लिये होते तो आज हम भी साफ्टवेयर कंपनियों में बिल गेट्स तो नहीं, कम से कम सत्यम नादेंडला तो जरूर बन गए होते।

यही नहीं, हम सब आपकी बात माने होते तो आज रायलसीमा स्वर्णिमसीमा बन गया होता और सिंगापुर की तर्ज पर पूरे राज्य का विकास हुआ होता। हर घर में बच्चों की जगह रोबोट घूमते नजर आते, क्योंकि उन्हें न भूख लगती और न प्यास। इससे रायलसीमा को पीने और सिंचाई के लिये पानी की जरूरत ही नहीं पड़ती। चंद्रबाबू नायडू जी आप बहुत आगे की सोचते हैं, हम ही मूर्ख हैं जो आपको गलत समझ बैठे।

आपने न केवल कृषि को व्यर्थ बताया बल्कि आपने अपनी जन्मस्थली रायलसीमा को कृषि रहित क्षेत्र में तब्दील कर दिया है। यहां जब पानी ही नहीं है तो खेती कहां से करेंगे। पोतीरेड्डीपाडु से कृष्णा बाढ़ कनाल का पानी न मिले यही सोचकर आपने वर्ष 1996 में ही श्रीशैलम जलाशय का न्यूनतम जलस्तर 854 से घटाकर 834 फुट करके किसानों के हाथ और पैर बांध दिये थे।

आपकी सोच की दाद देनी चाहिए, क्योंकि आपने केवल एक ही शासनादेश-69 लाकर पूरे रायलसीमा को कृषिरहित क्षेत्र में तब्दील कर दिया। इसीलिए तो आपने अब तक लोगों को स्थाई रूप से कृषि मुक्त बनाने के लिये कोई अन्य सिंचाई परियोजना शुरू नहीं की है।

चंद्रबाबू नायडू जी आपने यही सोचा होगा कि अगर रायलसीमा में किसी नई सिंचाई परियोजना का निर्माण कर अनंतपुर जिले के लोगों को सिंचाई जल मुहैय कराया गया, तो बेंगलुरु, चेन्नई और केरल में काम करने के लिये सस्ते मजदूर कहां से मिलेंगे। किसी ने कर्नूल जिले में एक नामी व्यक्ति को गांव में स्कूल शुरू करने की सलाह दी थी।

तब उसने कहा कि सभी स्कूल जाएंगे तो मजूदरी कौन करेगा? उसी तर्ज पर आपने यही सोचकर यहां कोई परियोजना नहीं शुरू की ताकि सभी किसान बनकर खेती करेंगे तो पड़ोसी राज्यों में जाकर मजदूरी करने वाला नहीं बचेगा। ऐसे भी राज्य की नई राजधानी में निर्माण कार्यों के लिए कुछ अनुभवी कामगारों की जरूरत तो पड़ेगी ही।

जिस थाली में खाया उसी थाली में छेद करने की परंपरा केवल आप से नहीं बल्कि दशकों से चली आ रही है। रायलसीमा में पैदा होकर उसके विकास में भागीदार बनने की सीख हमें विरासत में मिली है। सत्ता हासिल करने के लिये तरह-तरह के हथकंडे अपनाने का सिसलसिला 1953 से चला आ रहा है।

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इस मामले में चंद्रबाबू नायडू जी आपकी जरूर तारीफ करनी होगी, क्योंकि हम कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की झोपड़पट्टियों और सड़कों पर भीख मांग रहे हैं, लेकिन देश-विदेश में हमारे रायलसीमा के लाल के रूप में आपका नाम गूंजना हमारे लिये गर्व की बात नहीं तो क्या है?

चंद्रबाबू नायडू जी आप बड़े दरियादिल व्यक्ति हैं, लेकिन आपके क्षेत्र के न्यायोचित हितों की अनदेखी कर कम से कम रायलसीमा में नहीं तो डोन की पहाड़ियों में राजाधानी बनायी गई होती, तो रायलसीमा के लिए अच्छा होता। लेकिन आपने पक्षपात के आरोप से बचने के लिए गुंटूरु-विजयवाड़ा के बीच अमरावती में राजधानी बनाई।

इसीलिये आपने शिवरामकृष्णन की रिपोर्ट की परवाह नहीं की। राजधानी तो नहीं अब रायलसीमा में कम से कम हाईकोर्ट बनाने की मांग को लेकर रायलसीमा के लोग आंदोलन कर रहे हैं। आपने इस आंदोलन पर पानी फेरने के लिये पवन कल्याण, जयप्रकाश नारायण तथा आंध्र के बुद्धिजीवियों को मैदान में उतारा है। विशेष दर्जा, बजट आवंटन, नई नीति, विभाजन कानून में शामिल मुद्दे, हंद्रीनीवा-गालेरु-नगरी परियोजनाओं को पूरा करना, बुंदेलखंड पैकेज, कडपा में स्टील प्लांट की स्थापना और अमरावती को फ्री जोन बनाने या फिर जनसंख्या के आधार पर रोजगार देने की मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

यही नहीं, क्षेत्रों के बीच कोई भेदभाव नहीं है, ये साबित करने के लिये आपने अमरावती के चारों तरफ निर्माण के लिये रायलसीमा से लालचंदन सहित सभी प्राकृतिक संसाधन अमरावती को भेंट कर दिए। अमरावती और पोलवरम अगर आपकी दो आंखें है तो रायलसीमा को देखने के लिये आपके पास तीसरी आंख नहीं है, इसलिए रायलसीमा की अनदेखी होने में आपकी गलती नहीं है, ये तो हमारी बदकिस्मती है।

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चंद्रबाबू नायडू जी आप हमारे रायलसीमा के बेटे हैं, इसीलिये हमारी छाति 56 इंच फैल रही है। गर्व के मारे हम अपने दुख भूल जाते हैं। रायलसीमा से AIIMS, कैंसर इंस्टीट्यूट, आखिर में अनंतपुर मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूर किये गये 9 करोड़ रुपये तटीय आंध्र को भेज दिया। पद्मावती मेडिकल कॉलेज में रायलसीमा की बालिकाओं के लिये आवंटित सीटें आपने तटीय आंध्र की बालिकाओं को दे दी।

आखिर में आपको सुप्रीम कोर्ट के फटकार की परवाह तक नहीं है। पढ़ाई और तरक्की केवल तटीय आंध्रवालों को चाहिए, रायलसीमा वालों को इसकी क्या दरकार है? आप ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर रहे हैं, रायलसीमा को छोड़कर बाकी किसी भी जगह पर इसे स्थापित करना संभव नहीं होने और यहां अधिक बेरोजगारी होने के कारण कारखाना यहीं लगा रहे हैं।

अगर हम न्यूक्लियर फ्यूअल कांप्लेक्स की बात करें तो उसमें एक बार लीकेज होने पर यहां के बेरोजगार ही नहीं बल्कि भूख से तड़प रहे रायलसीमा के लोग केवल खेती से नहीं बल्की पूरी दुनिया से अलविदा हो जाएंगे। चंद्रबाबू नायुडू जी आपके मंत्री पुत्र बेटे लोकेश बाबू ने KIA मोटार्स कंपनी की आधारशिला रखने से पहले ही राज्य के पांच लाख लोगों को रोजगार दे दी है।