लखनऊ : यूपी के बागपत जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जेल में मुन्ना बजरंगी को गोली मार दी गई। मुन्ना बजरंगी को पेशी के लिए झांसी से बागपत लाया गया था। रंगदारी मामले में आज उसकी कोर्ट में पेशी होनी थी।

इस वारदात के बाद जेल प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही जेलर और डिप्टी जेलर समेत 5 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुन्ना बजरंगी की हत्या के पीछे पश्चिमी उप्र और उत्तराखंड में सक्रिय सुनील राठी गैंग का हाथ बताया जा रहा है। सुनील राठी यूपी के साथ उत्तराखंड में सक्रिय है। सुनील की मां राजबाला छपरौली से बसपा से चुनाव लड़ चुकी है।

माफिया मुन्ना बजरंगी को बागपत अदालत में पेश करने के लिए पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार को एंबुलेंस से भेजा गया था। पिछले साल मुन्ना बजरंगी पर एक पूर्व विधायक और उसके भाई को धमकाने का आरोप है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को होनी थी।

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पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से 22 सितंबर 2017 को फोन पर रंगदारी मांगने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप था। बागपत की कोतवाली में मामला दर्ज हुआ था। पुलिस की छानबीन में लखनऊ के सुल्तान अली और झांसी जेल में बंद मुन्ना बजरंगी का नाम सामने आया था।

इस बीच योगी आदित्यनाथ ने कहा, " जेल में हत्या कैसे हो गई। इसकी जांच कराई जाएगी और इसमें जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नही जाएगा। पूरे मामले की रिपोर्ट मंगाई गई है।"

इससे पहले मुन्ना की पत्नी ने एसटीएफ पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

मुन्ना की पत्नी ने आशंका जताई थी कि स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) आतंक का पर्याय माने जाने वाले माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को मुठभेड़ में ढेर करने की फिराक में है।

सीमा ने कहा था कि जेल में ही उसके पति के खाने में जहर देने की कोशिश की गई है। सीसीटीवी फुटेज में भी इसकी रिकर्डिग है, जिसमें एक एसटीएफ अधिकारी जेल में ही मुन्ना बजरंगी को मारने की बात कह रहे हैं। इसकी शिकायत कई अधिकारियों और न्यायालय से की, लेकिन कहीं से भी सुरक्षा नहीं मिली। उसने हालांकि यहां तक कहा, "सिर्फ पति ही नहीं, मेरे पूरे परिवार पर जान का खतरा है।"

सीमा सिंह ने कहा, "मेरे भाई की हत्या 2016 में की गई, लेकिन पुलिस ने इस मामले में सिर्फ टालमटोल कर केस बंद कर दिया। इसके बाद हमारे शुभचिंतक तारिक मोहम्मद की भी हत्या कर दी गई, लेकिन पुलिस खाली हाथ बैठी रही। पुलिस जांच करने के बजाय परिवार के लोगों को परेशान कर रही है।"